क्या हैं ये चमकी बुखार जो बिहार में बच्चो पर कहर बरपा रहा है.

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Chamki bukhar latest update
Chamki bukhar

क्या है चमकी बुखार (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम)?
चमकी बुखार या एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम दोनों एक ही नाम हैं. इसका दूसरा नाम मौत भी कह सकते है ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्यूंकि जिस तरह ये बुखार (चमकी बुखार) अब तक बिहार में कहर बरपा रहा है ओ किसी जलजला से कम नहीं हैं. अब तक इस चमकी बुखार से 25 दिन में लगभग 200 बच्चो की मौत केवल मुजफ्फरपुर जिला के अस्पताल में हो चुकी है. अभी इसकी रोकथाम करना बिहार सरकार की एक बहुत बरी चुनौती है. कुछ डॉक्टर का कहना हैं की इस बीमारी में हाइपोग्लाइसीमिया (खून में अचानक शुगर की कमी या सोडियम की कमी) जिसके कारण बच्चो की जाने जा रही हैं. लेकिन केंद्रीय मेडिकल टीम अभी भी इसकी जाँच में लगी हुई हैं. कुछ डॉक्टर सीधे तौर पर एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम को इसका जिम्मेदार कहने से भी बच रहे हैं.

क्या हैं इस बीमारी का लक्षण?

Symptoms of chamki fever
Chamki fever

इस बीमारी से (चमकी बुखार) से रोज हो रही मौतों के लक्षण के बारे में डॉक्टर से पूछा गया तो डॉक्टर ने इसका जवाब इस प्रका दिया .

  • चमकी बुखार में बच्चा पर बहुत तेज बुखार चढ़ा ही रहता हैं.
  • पुरे बदन में ऐठन और शरीर में दर्द भी होता हैं.
  • बच्चे को दाँत भी लगता हैं यानि की दाँत पे दाँत चढ़ना.
  • बच्चे का बार बार बेहोस होना भी इसका लक्षण मन जा सकता हैं.
  • शरीर का सुन्न सोना.
  • कभी कभी ऐसा भी होता हैं की आप बच्चा को चुटी काटेंगे तो उसको पता नहीं चलेगा जो की नार्मल बुखार में ऐसा नहीं होता हैं.

सरकार का क्या काम हैं इसको रोकथाम के लिए?

बिहार में और केंद्र में दोनों जगह ही NDA की सरकार हैं इसके बाद भी सरकार की ओर से कोई ठोस कदम अभी तक देखने को नहीं मिल रहा हैं.सरकार को चाहिए की इस बीमारी के जो मूल कारण है उसका पता करना और सभी हॉस्पिटल में इसको लेकर डॉक्टरो के साथ बैठक करे और इससे निपटने के लिए हरदम तैयार रहना. सरकार को इस बीमारी के लक्षण और उपचार के लिए लोगो को जागरूक करने के लिए ठोस कदम उठाने की जरुरत हैं. अगर सरकार हाथ पे हाथ रखकर इसी तरह बैठी रही तो बच्चो की जान जाती रहेगी. अभी भी सरकारी अस्पताल मर चमकी बुखार को लेकर कुछ खास इंतजाम नहीं देखने को मिल रहे हैं. सरकार को चाहिए की इसको लेकर हर एक अस्पताल में कुछ खास इंतजाम किया जाये और आने वाले दिनों में इस चमकी बुखार से बच्चो की जान जाने से रोकी जाये.

आम जनता को इस चमकी बुखार को लेकर क्या करना चाहिए?

आम जनता को चाहिए की वो अपने बच्चे पर पूरी तरह से नजर रखे और अपने बच्चे के हर एक बदलाव को नोटिस करे. अगर ऊपर दिए गए लक्षण में कोई भी लक्षण आपके बच्चे में दिखाई दे तो तुरंत बच्चे को डॉक्टर के पास लेकर जाये. अगर गांव में रहते हैं तो झोला छाप डॉक्टर और झाड़ फूंक से बचे इससे आपके बच्चे की जान भी जा सकती हैं. अपने बच्चे को सही पोषण और संतुलित आहार दे. अगर आपको सही पोषण और संतुलित आहार के बारे में जानकारी नहीं हैं तो अपने नजदीकी आंगनवाड़ी सहायिका/ANM से मिलकर इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. बच्चो को संतुलित आहार देने से ही कई बिमारिओं से बच्चो को बचाया जा सकता हैं.

ये चमकी बुखार बच्चो को ही क्यों होता हैं?

चमकी बुखार बच्चो को ही क्यों होता हैं?

कुछ डॉक्टरों से बात करने के बाद पता चला की इस बीमारी में बच्चे ही दिमागी बुखार के शिकार होते है. क्यूंकि बच्चे में बड़ो के अलावा इम्युनिटी कम होती है जिसके कारण बच्चे कड़ी धुप को नहीं झेल पाते हैं. और बच्चो के शरीर में बड़ो के अलावा पानी की कमी के कारण हाइपोग्लाइसीमिया के जल्द शिकार हो जाते हैं. कुछ कुछ मामलो में बच्चो के शरीर में सोडियम की भी कमी हो जाती है. हालाँकि कुछ कुछ डॉक्टर इन सभी कारणों से इंकार भी करते है.

चमकी बुखार गर्मी में ही क्यों होती हैं?

Chamki bukhar in summer
Summer

चमकी बुखार और गर्मी के मौसम का काफी गहरा कनेक्शन हैं. पिछले कुछ सालो को देखा जाये तो इस बीमारी में बच्चो की मौत ज्यादातर मई,जून और जुलाई के महीने में हुई हैं. इस महीने में पुरे बिहार में भीषण गर्मी और तेज धुप पड़ती हैं. अगर आप ज्यादा गहराई में देंखेंगे तो इस बीमारी से ज्यादातर गांव के गरीब परिवार के बच्चे की मौत हुई हैं. इससे ये पता चलता हैं की गांव में बच्चे खाली बदन खेतो में इधर उधर घूमते हैं जिससे उनके शरीर में पानी और सोडियम की कमी हो जाती हैं जिसके कारण ये चमकी बुखार उनको आसानी से अपनी चपेट में ले-लेती हैं.

चमकी बुखार में क्या-क्या सावधानी बरते?

Caution of chamki bukhar
Caution of chamki bukhar

इस बीमारी से सावधानी बरतने के लिए घरवालों को कुछ खास ध्यान देने होंगे.

  • बच्चो को कड़ी धुप में जाने से रोंके.
  • किसी भी हालत में बच्चे को जूठे और सड़े फल खाने को ना दें.
  • बच्चे को गंदगी से बिलकुल दूर रखे.
  • खासकर गांव देहात में बच्चो को सूअर और गाय से दूर रखे.
  • बच्चे को खाना खाने से पहले अच्छी तरह से हाथ जरूर धुलवाए.
  • शुद्ध जल पिए और बच्चो को भी पिलाये.
  • बच्चे को धुप में खेलने से बिलकुल मना करे.
  • बच्चे के साफ सफाई पे कुछ खास ख्याल दें.

चमकी बुखार का इलाज क्या हैं?

Treatment of chamki bukhar

अगर आपके बच्चे में चमकी बुखार के लक्षण देखने को मिल रहा हैं तो तुरंत अच्छी हॉस्पिटल में लेकर जाये. इस बीमारी में मरीज के शरीर में पानी की कमी नहीं होने देना चाहिए. चमकी बुखार में मरीज के शरीर में शुगर की भी कमी हो जाती हैं इसलिए मरीज को मीठा भी दिया जाता हैं. चमकी बुखार में बच्चे को समय समय पर लिक्विड फ़ूड देते रहना चाहिए जिससे की उसके शरीर में पानी का संतुलन बना रहे. डॉक्टर अभी तक इस बीमारी का कोई ठोस और कारगर इलाज नहीं खोज पाएं हैं और सरकार भी इसके लिए कुछ खास नहीं कर पा रही हैं . इस बीमारी में जान जाने का चांस बहुत ज्यादा होता हैं. इसलिए सावधान रहे, सचेत रहे और जागरूक रहे.

क्या है लीची और चमकी बुखार का कनेक्शन?

Chamki bukhar lichi
Lichi

बिहार में प्रशासन, लोगो को अपने बच्चे को खाली पेट लीची खाने से मना कर रहे हैं और कच्ची लीची खाने से भी मना किया जा रहा हैं. क्यूंकि कुछ शोधकर्ताओं का मानना हैं की लीची में कुछ खास प्रकार के एसिड पाएं जाते हैं जो खाली पेट खाएं जाने पर शरीर को नुकसान पंहुचा सकते हैं. खासकर कच्ची लीची में इस प्रकार के एसिड की मात्रा ज्यादा होती हैं. जो बच्चे सुबह सुबह उठकर सीधे लीची के बागान में जाकर खाली पेट ही भर पेट लीची अगर खा लेता हैं तो उसके लिए ये जानलेवा साबित हो सकता हैं.

Chamki bukhar

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