Real love story in hindi

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Hindi story real
Real story in hindi

एक लड़की का १५वां जन्मदिन था। उसके दोस्तों ने पार्टी मांगी। सभी दोस्त बाहर जाते हैं पार्टी के लिए। वहां दोस्तों के भी दोस्त मिल ग‌ए। उनमें  एक लड़का था जो बहुत खुबसूरत था। वहीं दोनों में दोस्ती हो जाती है। और दोनों यहां – वहां मिलने लगे। अब दोनों में अच्छी दोस्ती हो गई। एक दिन लड़के ने लड़की को बङे प्यार से बुला कर कहा,-
लड़का – हाए कैसी हो।
लड़की – ठीक हुं। कहो क्यु बुलाया है आज…..
लड़का – कहीं बाहर चले।
लड़की – कहा
लड़का – किसी अच्छी जगह चलते हैं। किसी पार्क या किसी रेश्टोरेंट में। जहां हम आराम से कुछ बातें कर सकें।
लड़की – क्या बात करनी है
लड़का – चलो तो। डर रही हो क्या मुझसे।
लड़की – नहीं तुमसे कैसा डर ।
लड़का – तो चलें।
दोनों एक पार्क में जाते है। वहां एक तरफ बैठ कर पहले तो इधर उधर की बातें करता है। और फिर एक तोहफा और कार्ड देता है। और कहता है कि इसे घर जाकर खोलना।
तोहफा लेकर चली जाती है। घर पहुंच कर अपने कमरे में जाकर तोहफा खोलती है। एक प्यारा सा जोरा के साथ गुलाब की पंखुड़ियों सी खुशबू वाली सेंट थी। अब उसने कार्ड खोला। उसमें बरे प्यार से I LOVE YOU लिखा था और आगे लिखा था कि अगर तुम भी मुझसे प्यार करती हो तो। कल सेंट लगाकर उसी पार्क में साम के 5 बजे आ जाना।
अगले दिन पार्क में लड़का बैठा था कि तभी अचानक लड़की का भाई वहां आ जाता है। और उस लड़के से बात करने लगता है। उसी वक्त लड़की आती है और अपने भाई को उस लड़के से बात करते हुए देख चुपचाप लौट जाती है। लड़का लड़की को नहीं देख पाता है। उसे लगता है लड़की उससे प्यार नहीं करती है। उसके अगले दिन लड़की किसी शादी में चली जाती है। लड़का उदास रहने लगता है। एक महीने बाद लड़की वापस आती है और साम होते ही उसी पार्क में जाती है। और उसी जगह जाकर बैठ जाती है। कुछ देर बाद लड़का भी वहां आ जाता है। दोनों एक दूसरे को देखते है। कुछ देर बस आंखों ही आंखों में बातें होती  हैं। फिर अचानक
लड़का – तुम बिन कुछ कहे चली गई मुझे लगा तुम मुझसे नाराज़ हो गई।
लड़की – नहीं वो मैंने भाई को देखा तो डर गई और वापस चली गई। अगले दिन बुआ आई और बोली बेटी की शादी है। चलो लेने आई हुं। मैं क्या करती जाना परा ।
लड़का – अच्छा ठीक है तो तुमने क्या सोचा है।
लड़की – शर्म से सिर झुका लेती है और एक चिट्ठी देकर वहां से चली जाती है।
लड़का चिट्ठी खोलता है। उसमें लिखा था मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूं। तुम्हारे बिना नहीं रह सकती।
अब तो रोज मुलाकातें और बातें होने लगी। दोनों अक्सर अपने क्लाश से गायब होने लगें। इससे पढ़ाई-लिखाई पर भी ध्यान नहीं दे पा रहे थे। अब उस लड़के के पिता ने उसे दुसरे शहर में पढ़ाई के लिए भेज दिया। जाते-जाते दोनों पार्क में मिलने जाते हैं।
लड़का – अब मैं जब भी घर आऊंगा तो तुमसे मिलने जरूर आऊंगा।
लड़की – ठीक है।मन लगाकर पढाई करना। और लड़की की आंखें नम हो जाती है।
लड़का – तुम रोती हुई अच्छी नहीं लगती हो। हमेशा मुस्कराते रहना ताकि मुझे अच्छी वाली फिलिंग्स आती रहे। और पढ़ाई में मेरा मन लगे।
दोनों एक दूसरे को गले लगा लेते हैं और फिर लङका चला जाता है। अब दोनों कभी कभी फोन पर बात कर लेते या फिर छुट्टियों में ल‌‌ङका जब घर आता तो। जब भी वो घर आता तो आते ही छत पे जाकर उपर से ही मां- मां जोर से चिल्लाता। और लड़की समझ जाती कि आगया। फिर दोनों पार्क में मिलने जाते। कुछ दिन तो सब ठीक रहा। लेकिन धिरे धिरे आस पास के लोगों ने बातें बनाना शुरु कर दिया। एक दिन लड़की के भाई ने परोसियों की बातें सुन ली। घर आकर उसने अपनी मां को सब बताया। मां – बेटा जब तक हम अपनी आंखों से नहीं देख लेते हैं। उससे क्या कहेंगे।
बेटा – तो क्या ऐसे ही छोड़ दें।
मां – नहीं। अब उसपे ध्यान देना होगा।
बेटा – ठीक है मां। अब से जब भी वो कहीं जाए तो मुझे बता देना। मैं उसके आसपास रहुगा।
अब लड़की का भाई हमेशा उसके आसपास रहने लगा। दोनों का मिलना जुलना तो जैसे बंद हो गया। लड़की बेचैन रहने लगी। एक दिन उसकी सहेलियों के बहुत पुछने पर उसने सब कुछ बता दिया। और उनकी मदद से दोनों में बातें होने लगी। एक दिन लड़के ने कहा मुझे तुमसे मिलने का तुम्हें देखने का बहुत मन कर रहा है। लड़की ने अपनी सहेलियों से मदद मांगी। उनमें से दो ने उसकी मदद की। एक पार्क के दरवाजे पर रही और दुसरी थोरी दुरी पर। दोनों ने कुछ देर बातें की और फिर अपने – अपने घर चले गए।
अब तो लड़के को जैसे चस्का लग गया हो। वो अक्सर ही मिलने की बातें करने लगा। एक- दो बार तो लड़की की सहेलियों ने मदद की। फिर उनको भी तो परिवार का डर था। उन्होंने भी मना कर दिया।
एक दिन दसवीं की टेस्ट परिक्षा चल रही थी। तभी खिड़की से बाहर एक लड़की की नजर गई। खिड़की के पास ही वो लड़का खरा था। उस लड़की ने अपनी सहेली से कहा देख तेरा दिवाना खरा है। और सब हंसने लगे । टेस्ट खत्म होने पर सब घर की तरफ चलें। लड़का पीछे – पीछे आ रहा था।
लड़का – मुझे तुमसे बात करनी है
लड़की – मैं नहीं कर सकती। कोई देख लेगा तो मैं क्या जवाब दूंगी।
लड़का – देखता है तो देखे मैं नहीं डरता किसी से
लड़की – तुम नहीं डरते मैं तो डरती हुं।चले जाओ।
लड़का – चला जाऊं। तुम्हें पता है मेरे दोस्त मुझे तुम्हारी वजह से लफ्फु बोलने लगे हैं
ये सुनकर उसकी एक सहेली से रहा नहीं गया और वो बोली। ऐसा ही है तो इसे छोड़ कर चले क्यु नहीं जाते।
लड़का – चला कैसे जाऊं। बचपन का प्यार है मेरा। ऐसे कैसे छोड़ दूं।
बातों-बातों में घर नजदीक आगया और वो चला गया। अब दसवीं की परीक्षा खत्म हो चुकी थी। वो लड़की भी आगे की पढ़ाई के लिए बरे शहर जाती है।
इत्तेफाक से लड़की भी उसी शहर में जाती है । जिस शहर में लड़का रहता था। एक दिन दोनों की मुलाकात हो जाती है। अब तो वहां कोई डर नहीं। दोनों एक साथ घूमने-फिरने लगें।उनका प्यार परवान चढ़ने लगा। धीरे धीरे पढ़ाई भी पुरी हो गई। अब दोनों घर वापस आएं तो दोनों ने अपने-अपने माता पिता से बात की दोनों एक ही जाति और धर्म के थें। लड़का भी देखने में अच्छा था। पढ़ा लिखा भी था। लड़की के परिवार वाले मान गए।
लड़की भी खुबसूरत और लम्बी थी। बरों का आदर करने वाली थी।सो लड़के के परिवार वाले भी मान गए धुम धाम से शादी हो गई। दोनों परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई।

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