एक औरत की उलझन

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एक औरत की उलझन

पत्नी – सुनिए कुछ ही दिनों में त्योहार आ रहा है। कुछ पैसे………… ।
पति – क्यूं। पैसों की क्या जरूरत पर गई।
पत्नी – वो एक सारी लेने का बहुत मन कर रहा था।
पति – ठीक है ले लेना । आज पैसे नहीं हैं कल।
पत्नी –  ठीक
दो दिन बाद
पत्नी – वो उस दिन आपने कहा था। पैसों के लिए……
पति – ठीक है ले लेना। अभी तो त्योहार में समय है न
पत्नी – वो मोहल्ले की औरतें बाजार जा रही थीं।तो मैं भी उनके साथ ही………….
पति – उनके साथ ही जाना जरूरी है क्या।बाद में नहीं ले सकती। त्योहार में अभी कुछ दिन बाकी हैं।
पत्नी – चुपचाप अपने कमरे में चली जाती है।
(और फिर अगले दिन मां)
मां – बेटा कुछ पैसे हैं।
बेटा – कितने चाहिए मां।
मां – वो त्योहार है कुछ दिन में, तो तेरी बहन और भाईयों के लिए कुछ कपड़े ले आती।
बेटा ( पत्नी को पुकारते हुए) –  मेरा ATM लेते आना।
पत्नी – ATM लाकर दे देती है।
बेटा (मां को ATM देते हुए) – ऐ लो मां सबके लिए कपरे ले लेना।
उसी दिन साम को मां सबके कपड़े दिखलाती है।
बेटा – मां तेरी बहु के लिए……… ।।।
मां – उसके पास तो इतनी सारी सारीयां परी है बक्से में। निकालकर कोई भी पहन लेगी। ज्यादा खर्च करने की क्या जरूरत है।

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